बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक गिलहरी और एक कौआ रहते थे। गिलहरी बेहद मेहनती थी और हमेशा ठंड के मौसम के लिए खाने का इंतजाम करती रहती थी। दूसरी ओर, कौआ बहुत आलसी था और सोचता था कि किसी न किसी तरह उसका काम हो ही जाएगा।
एक दिन गिलहरी ने कौए से कहा, "कौआ भाई, ठंड का मौसम आ रहा है। तुम्हें भी कुछ खाने का इंतजाम कर लेना चाहिए।"
कौआ हंसकर बोला, "अरे! चिंता मत कर, मेरे पास ढेर सारे दोस्त हैं, जब जरूरत पड़ेगी, मैं उनसे ले लूंगा।"
गिलहरी ने फिर भी उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन कौआ उसकी बातों को अनसुना करता रहा।
समय बीता, ठंड का मौसम आ गया। जंगल में खाने की कमी हो गई, और कौए को अब एहसास हुआ कि उसने गलती की है। उसने अपने दोस्तों से मदद मांगी, पर सभी अपने खाने का इंतजाम कर चुके थे और किसी के पास ज्यादा खाना नहीं था।
थक-हार कर कौआ गिलहरी के पास पहुंचा और मदद की गुहार लगाई। गिलहरी ने कहा, "मैंने तो तुम्हें पहले ही सावधान किया था, फिर भी मैंने थोड़ा अतिरिक्त खाना रखा है, जिसे हम दोनों मिलकर खा सकते हैं।"
कौआ बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने वादा किया कि आगे से वो भी मेहनत करेगा और समय पर खाने का इंतजाम करेगा।
कहानी से सीख: हमेशा समय रहते मेहनत करना चाहिए ताकि मुसीबत के समय हमें दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
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[ 67.5 ms ] story [ 270 ms ] threadएक दिन गिलहरी ने कौए से कहा, "कौआ भाई, ठंड का मौसम आ रहा है। तुम्हें भी कुछ खाने का इंतजाम कर लेना चाहिए।"
कौआ हंसकर बोला, "अरे! चिंता मत कर, मेरे पास ढेर सारे दोस्त हैं, जब जरूरत पड़ेगी, मैं उनसे ले लूंगा।"
गिलहरी ने फिर भी उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन कौआ उसकी बातों को अनसुना करता रहा।
समय बीता, ठंड का मौसम आ गया। जंगल में खाने की कमी हो गई, और कौए को अब एहसास हुआ कि उसने गलती की है। उसने अपने दोस्तों से मदद मांगी, पर सभी अपने खाने का इंतजाम कर चुके थे और किसी के पास ज्यादा खाना नहीं था।
थक-हार कर कौआ गिलहरी के पास पहुंचा और मदद की गुहार लगाई। गिलहरी ने कहा, "मैंने तो तुम्हें पहले ही सावधान किया था, फिर भी मैंने थोड़ा अतिरिक्त खाना रखा है, जिसे हम दोनों मिलकर खा सकते हैं।"
कौआ बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने वादा किया कि आगे से वो भी मेहनत करेगा और समय पर खाने का इंतजाम करेगा।
कहानी से सीख: हमेशा समय रहते मेहनत करना चाहिए ताकि मुसीबत के समय हमें दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।